चन्द्र सिंह "बादळी"

जीवन परिचय

*जन्म -27 अगस्त 1912
*देहांत -14 सितम्बर 1992

Tuesday, June 29, 2010

सुभान तेरी कुदरत

परभात रो सुहावनो पो'र !चोखो चैतवाडो !फोग फूटे ! कैर बाटे सूं लड़ालुंब ! धरती पर पड़ी ओस जाणे मोती !
पवन रा हळका लैरका लोरी सी देवे ! धरती री हरी साड़ी पर उगते सूरज री किरणा कसीदो सो काढ़े! जंगल में मंगल !
जगां जगां हिरणा री डारां ! काला हिरण आगै सिरदार सा चालै ! लारै हिरणयां ! बाखोट ऊछले !चट चोकड़ी साधे तो लाहोरी कुता रा कान काटे ! झाडया रे ओले लूंकड़ी पूंछ रमाती फिरै ! स्याल अर स्याली रात रा धायेडा,कोरै कोरै टीबां पर लोटपलोटा खावै, किलोल करै, रागन्या काडै ! तो कठे सुसिया मखमल सी घास पर रुई रा फ़ैल सा उड़तां दिसे तो कठे आखरी में बेठयां गेळ करै ! भांत भांत ऋ चिड़ियाँ चर चर करै ! कैरां पर गोलिया टूट्या पड़े ! सारी रोही चैचाट करै !
उण समै एक तितर खेजडी सुं उड़ कोरी सी टीबी पै नीचे उतरयो! सामै दीवल सुं भरयो पुराणो छाणो दिस्यो ! डग खुली, नस उठी, चोफेर देख्यो !जंगल में मंगल देख फूल्यो !आखी जियाजूण जीवण सनेसो दियो ! खुसी रो अन्त न पार !मगन हो पुरै जोर सुं बोल्यो ! सारी रोही गूंजी-'सुभान तेरी कुदरत' ! तितर रो बोलणो हुयो, ऊपर उडतै लक्कड़बाज री आँख चट उण पर पड़ी ! पवनवेग, सरसप्प नीचो आयो !पाछो ऊंचो चढयो तो तितर बाज रै पंजे में हो, दीवल छाणे में ! दुसरो तितर बोल्यो !रोही फेर गूंजी -"सुभान तेरी कुदरत" !!!

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चन्द्र सिंह "बादळी"

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नोहर, राजस्थान, India
आधुनिक कल में प्राकर्तिक काव्य लिखने की परम्परा कु.चन्दरसिंह बिरकाली से शुरू हुई! आपका जन्म सावन सुदी संवत १९६९ विक्रमी २७ अगस्त १९१२ में बिरकाली गाँव में हुआ ! आप "बादली" और 'लू' जैसी मौलिक रचना के साथ 'कहमुकुरनी','सीप','बाल्साद', ;साँझ',(काव्य) और 'दिलीप', 'कालजे री कौर', राजस्थानी निबंध संग्रह, 'मेघदूत', 'चित्रागादा', 'जफरनामो', 'रघुवंश'(अनुदित)रचनाएँ की !आपकी बंसत, डंफर, धोरा,और बाड़ अनछपी रचनाएँ है ! जुनी राजस्थानी साहित्य की रचना में प्रकर्ति काव्य की एक अच्छी परम्परा है लेकिन आधुनिक कल में इसकी शुरुआत कु.चन्दरसिंह की 'बादली' से शुरू हुई !बादली १९४१ में छपी इसमें १३० दोहे है ! इसके दोहे मरुभूमि की वरसाला ऋतु की प्राकतिक छठा का विवेचन करते है !कवि बरसात से पहले की स्थिति का वर्णन 'बादली' में किया है ! ऐसे ही १९५५ में छपी 'लू'में १०४ दोहे है !'लू' में लू का बनाव सृंगार जोग है !कवि राजस्थान के वासी है ! इसलिए उन्हें इस बात का ध्यान है ! कु.चन्दर सिंह मूल रूप से प्रकर्ति के चितेरे कवि है !