चन्द्र सिंह "बादळी"

जीवन परिचय

*जन्म -27 अगस्त 1912
*देहांत -14 सितम्बर 1992

Thursday, January 13, 2011

राजस्थानी निबन्ध सग्रह

राजस्थान साहित्य अकादमी ने हिंदी की तरह राजस्थानी में भी विभिन्न विधाओ के रचनाकारों को संकलित किया !
राजस्थानी निबन्ध संग्रह भी उसी योजना की कड़ी रही है!
जिसके संकलनकर्ता तथा संपादक चन्द्र सिंह बादळी थे !
१.मारवाड़ी समाज - श्री दामोदर शर्मा
२.सच बोल्या किया पर पड़े - श्रीलाल नथमल जी जोशी
३.लोक यात्रा - श्री मनोहर शर्मा
४.देश दसावर रा लोग - श्री गंगाराम पथिक
५.मात भाषा में शिक्षा अर राजस्थानी - श्री शक्तिदान कविया
६.मिनख जमारो - श्री मदनगोपाल शर्मा
७.राजस्थान अर उन् रो जीवन दरसन - श्री सुमेरसिंह शेखावत
८.पनघट री साँझ - श्री गिरराज भंवर
९.आपां काई खावा हाँ - श्री मिश्री लाल जैन'तरंगगीत'
१०.मेवाड़ी फागण - श्री लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत
११.थोथी बाता - श्री रावत सारस्वत
१२.भारतीय एकता रा सूत्र - श्री रामनाथ व्यास'परिकर'
१३.काव्य री परख - श्री कुंवर कृष्ण कल्ला
१४.रै मानखा ! - श्री रामचंद्र बोड़ा
१५.नुई कविता रै गोखे सुं - श्री ओंकार पारीक
१६.सहित अर उन् रा भेद -श्री गोवर्धन शर्मा
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famous rajasthani poet

चन्द्र सिंह "बादळी"

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नोहर, राजस्थान, India
आधुनिक कल में प्राकर्तिक काव्य लिखने की परम्परा कु.चन्दरसिंह बिरकाली से शुरू हुई! आपका जन्म सावन सुदी संवत १९६९ विक्रमी २७ अगस्त १९१२ में बिरकाली गाँव में हुआ ! आप "बादली" और 'लू' जैसी मौलिक रचना के साथ 'कहमुकुरनी','सीप','बाल्साद', ;साँझ',(काव्य) और 'दिलीप', 'कालजे री कौर', राजस्थानी निबंध संग्रह, 'मेघदूत', 'चित्रागादा', 'जफरनामो', 'रघुवंश'(अनुदित)रचनाएँ की !आपकी बंसत, डंफर, धोरा,और बाड़ अनछपी रचनाएँ है ! जुनी राजस्थानी साहित्य की रचना में प्रकर्ति काव्य की एक अच्छी परम्परा है लेकिन आधुनिक कल में इसकी शुरुआत कु.चन्दरसिंह की 'बादली' से शुरू हुई !बादली १९४१ में छपी इसमें १३० दोहे है ! इसके दोहे मरुभूमि की वरसाला ऋतु की प्राकतिक छठा का विवेचन करते है !कवि बरसात से पहले की स्थिति का वर्णन 'बादली' में किया है ! ऐसे ही १९५५ में छपी 'लू'में १०४ दोहे है !'लू' में लू का बनाव सृंगार जोग है !कवि राजस्थान के वासी है ! इसलिए उन्हें इस बात का ध्यान है ! कु.चन्दर सिंह मूल रूप से प्रकर्ति के चितेरे कवि है !